मंगलवार, 19 मई 2026

बेबस

देखा उसने
छुआ उसने
ठुकराया उसने
पाया उसने
दुलारा उसने
लताड़ा उसने
संभाला उसने
खंगाला उसने
दरवाज़े खोले उसने
और बंद भी किये
कभी बाहर से कभी अंदर से

मैंने ख़ुद को उसे दिया
उसने लिया, न लिया
जब चाहा जो चाहा उसने किया

कि बस मैं 
तड़फड़ाता उसके वश में
रह गया

कि बस मैं 
बह गया

उससे छीनता रह गया
ख़ुद को
टुकड़े ही बीनता रह गया
हीनता रह गया
कि बस मैं
उसके किये को ही जिया

उससे भाग रहा हूँ 
सिलवटों में उलझकर गिरा हुआ मैं
ख़ुद को भरसक आवाज़ लगाकर रुक जाने को कह रहा हूँ
ख़ुद को ख़ुद का नाकाम वास्ता देकर
 
कि बस मैं उससे नहीं ख़ुद से ही भाग रहा हूँ

मैं उससे भागता हुआ
उसी की ओर भाग रहा हूँ
कि बस मै...

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