गुरुवार, 16 जुलाई 2026

 16 जुलाई 2014


देहरी पर आए मिले गले लौट गए फिर अपने-अपने भीतर। इत्ती-सी तलाश है हमारी। भीतर से बाहर देहरी तक आना जोखिम भरा सफ़र है। उससे आगे तो और भी मुश्किल है ऐसा मुझे राजू गाइड ने बताया था। इसलिए लगता है आसान लौट जाना। 

लेकिन

समझ नहीं पाता देह है पुकारती 

अथवा देहरी...

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

 14 July 2017


जो लोग किसी दावत पर जाने की तैयारी दो दिन पहले से भूखे रहकर करते हैं वो दावत के बाद चार दिन तक कुछ भी नहीं खा पाते।

 14 July 2019


वीडियो चल रहा है। पर साउंड म्यूट है। 


नायक पियानो बजा रहा है। नायिका पीछे से आकर उससे लिपट जाती है। फिर वे उपवन  में हाथों में हाथ डाले एक-दूसरे से माइल्ड-माइल्ड-सा लिपटते-लिपटाते टची-टची होते-होते चल रहे हैं। 


रोमांटिक-सी सिचुएशन पर गाना भी होगा कोई रोमांटिक ही क्योंकि नायक राजेंद्र कुमार और नायिका नूतन (हालांकि अधेड़ावस्था में) की जोड़ी भी रोमांटिक है।


आप साउंड बढ़ाते हैं तो गाना रोमांटिक न होकर मोटिवेशनल निकलता है - मधुबन ख़ुश्बू देता है...जो औरों को जीवन देता है। 


सलाम है इन दोनों को।  लोकेशन क्या और गाना क्या! पर फिर भी जिन्होंने डायरेक्टर के सामने चूँ तक न की होगी, और (हमें क्या हमें तो शूट करके अगले शूट पर निकलना है वाला भाव रखकर) चुपचाप जैसा कहा गया वैसा किया और निभा गए। 


बाक़ी पूरी फिल्म देख चुके लोग बेहतर बता सकते हैं। हमने तो केवल गाना देखकर लिखा।