16 जुलाई 2014
देहरी पर आए मिले गले लौट गए फिर अपने-अपने भीतर। इत्ती-सी तलाश है हमारी। भीतर से बाहर देहरी तक आना जोखिम भरा सफ़र है। उससे आगे तो और भी मुश्किल है ऐसा मुझे राजू गाइड ने बताया था। इसलिए लगता है आसान लौट जाना।
लेकिन
समझ नहीं पाता देह है पुकारती
अथवा देहरी...
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